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किरायेदारों की पुलिस जाँच क्यों ज़रूरी है और ये कैसे की जानी चाहिए

किरायेदारों की पुलिस जाँच क्यों ज़रूरी है और ये कैसे की जानी चाहिए

किरायेदारों की पुलिस जाँच क्यों ज़रूरी है और ये कैसे की जानी चाहिए

भारत की रियल स्टेट की बदलती डायनेमिक्स के चलते आजकल किराए पर घर लेने का दौर सा चल रहा है। इसलिए अब किरायेदारों को ढूंढना और अपने निवेश से फायदा बनाना उतना मुश्किल नहीं रहा जितना पहले था। अगर आप एक प्राइम प्रॉपर्टी के मालिक हैं, तो आपके घर के बाहर किरायेदारों की लाइन लग सकती है।

हालाँकि, एक मकान मालिक के तौर पर, आपको किरायेदारों को रखते समय सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि आपके इन्वेस्टमेंट का फायदा पूरी तरह से उस किरायेदार पर निर्भर होता है जिसे आपने अपनी प्रॉपर्टी के लिए चुना है। आपके किरायेदारों की पुलिस जांच इस स्क्रीनिंग प्रोसेस का एक अनिवार्य हिस्सा है और आपको अपनी ख़ुद की सुरक्षा के लिए इसका पालन करना ज़रूरी है। अगर आप इस प्रोसेस को किए बिना ही अपनी प्रॉपर्टी किराए पर देते हैं, तो भविष्य में आपको परेशानी हो सकती है, आधिकारिक तौर पर भी।

इसका नमूना

दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस ने हाल ही में किरायेदार-जांच नियमों का पालन ना करने वाले (मकान मालिकों के खिलाफ 46 प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की है । यह कदम उस ख़ास सुरक्षा अभियान का हिस्सा है जिसे गणतंत्र दिवस समारोह के पहले से चलाया जा रहा है।

कानून ने मकान मालिकों के लिए अपने किरायेदारों की पुलिस जांच को अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में कोई भी चूक होने पर जेल हो सकती है या जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। लोक सेवक द्वारा घोषित आदेश के उल्लंघन से जुड़ी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 188 के तहत इस नियम का उल्लंघन करने वाले को " साधारण तौर पर जेल हो सकती है जिसकी अवधि एक महीने तक बढ़ाई  जा सकती है” या फ़िर “200 रु तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है । "

चूंकि जुर्माना काफी कम है, इसलिए नियमों का पालन अक्सर नहीं किया जाता है। कईं बार अगर आपको  किरायेदार ठीक लगता है तब भी आप प्रक्रिया का पालन करने की परेशानी से बचना चाहते हैं। आपको लगता है किरायेदार आपको या सिस्टम को क्या नुकसान पहुँचा सकता है? यहां तक ​​कि अगर सब कुछ ठीक भी है, तो भी एक मकान मालिक को सजा हो सकती है।

"यह ज़रूरी नहीं है कि अपराधी का नुकसान पहुँचाने  का कोई इरादा होना चाहिए, या वह उल्लंघन करके नुकसान पहुँचाने की सोच रहा है । यह काफी है कि वह उस आदेश को जानता है जिसका वह उल्लंघन कर रहा है, और उसका यही  उल्लंघन नुकसान होने की संभावना बनाता है, ”धारा 188 यही बताती है ।

(दक्षिण पश्चिम) पुलिस के डिप्टी कमिश्नर मिलिंद महादेव डुंबरे ने पीटीआई को बताया कि, "कईं जागरूकता अभियान चलाए गए हैं, लेकिन मकान मालिकों ने अभी तक किरायेदारों की जाँच के महत्व को नहीं समझा है। यह विशेष रूप से राजधानी में ज़रूरी है, जो आतंकी संगठनों के निशाने पर है।"

क्या आप एक मकान मालिक हैं जो अपने किरायेदार की पुलिस जाँच कराने की सोच रहे हैं? आप इसे ऐसे कर सकते हैं:

आपके किरायेदारों के पहचान प्रमाण की जाँच करने के दो तरीके हैं। आप इसे खुद कर सकते हैं या ऐसा करने के लिए किसी प्रोफेशनल की सर्विसेज़ ले सकते हैं। बैकग्राउंड की जाँच यह पक्का करती है कि आपको वो सारी जानकारी है जो एक मकान मालिक को अपने किरायेदार के बारे में पता होना चाहिए - उसकी आर्थिक स्थिति और उसका पिछला रिकॉर्ड (चूंकि सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है)। किरायेदार की पुलिस जाँच खत्म होते ही इस बैकग्राउंड जाँच का एक बड़ा हिस्सा पूरा हो चूका होगा।

ऐसा करने के लिए, आप ख़ुद अपने क्षेत्र के पुलिस स्टेशन से संपर्क कर सकते हैं और किरायेदार जाँच फॉर्म्स के लिए पूछ सकते हैं। सही प्रकार से भरे हुए डॉक्युमेंट्स में आपके और आपके होने वाले किरायेदार के सभी जानकारियां होंगी, जिन्हें फ़िर पुलिस के पास जमा करना चाहिए।

ज़्यादातर पुलिस स्टेशनों की वेबसाइट पर जाकर आप फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में, आपको किरायेदार जाँच के लिए इस एप्लीकेशन फॉर्म को डाउनलोड करके भरना होगा।

फॉर्म जमा होने के बाद आपको एक पावती रसीद (नॉलेज रिसीप्ट ) जारी की जाएगी।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने 2016 में यूपी पुलिस नागरिक सेवा, किरायेदारों की जाँच और घरेलू मदद के लिए एक ऐप लॉन्च किया है । इस दो-मेगाबाइट के ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। एक बार जब आप अपनी रिक्वेस्ट डालते हैं, तो पुलिस करीबी एरिया के पुलिस स्टेशन से आपके किरायेदार के बैकग्राउंड की जाँच करेगी, और जाँच के नतीजे के साथ आप से संपर्क करेगी । इसके इलावा, आप अपने किरायेदारों की पुलिस जाँच के आवेदन के लिए पुलिस की ऑफिशियल वेबसाइट पर भी लॉग इन कर सकते हैं।

उत्तराखंड पुलिस ने 2015 में इसी तरह का एक ऐप लॉन्च किया था,उत्तराखंड पुलिस ऐप।

Last Updated: Thu Nov 05 2020

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