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जानिए क्या है रेंट अग्रीमेंट की कानूनी वैधता?

जानिए क्या है रेंट अग्रीमेंट की कानूनी वैधता?

जानिए क्या है रेंट अग्रीमेंट की कानूनी वैधता?
(Curuni.com)
एेसा माना जाता है कि दुनिया की करीब 45 प्रतिशत आबादी किराये के मकानों में रहती है। किराये पर रहने के अपने फायदे और नुकसान हैं। हालांकि सरकार ने मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2015 के तहत कई गाइडलाइंस बनाई हैं, ताकि किरायेदार और मकानमालिक दोनों को फायदा हो। चूंकि जमीन राज्य का विषय है, इसलिए कई राज्य अब भी पुराने किराया नियंत्रण अधिनियम, 1948 का पालन करते हैं। नए कानून को अब भी कई राज्यों को फॉलो करना है। आज हम आपको किराया नियंत्रण अधिनियम, 1948 के तहत रेंट कॉन्ट्रैक्ट की कानूनी वैधता के बारे में बताएंगे।
 
क्या होता है रेंट अग्रीमेंट: रेंट अग्रीमेंट कम अवधि के लिए किरायेदारी मुहैया कराता है, जो अवधि पूरी होने के बाद रिन्यू कराया जा सकता है।
 
क्या होता आया है: आमतौर पर मकानमालिक और किरायेदार के बीच 11 महीने का अग्रीमेंट होता है, जिसमें रिन्युअल का अॉप्शन होता है। किराया नियंत्रण अधिनियम ज्यादातर किरायेदारों का पक्ष लेता है, लेकिन लीज अग्रीमेंट कम से कम 12 महीने के समझौते पर लागू होता है। 11 महीने के समझौते की वजह से मकानमालिक किरायेदारों को निकाल सकते हैं। इस वजह से सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पारित किया है।
 
गैर-पंजीकृत अग्रीमेंट: अगर 11 महीने के लिए गैर-पंजीकृत किराया समझौता किया गया है तो यह कानून की नजर में वैध है। यह एक वैध सबूत है, जिसे जरूरत पड़ने पर कोर्ट में पेश किया जा सकता है। 
 
रजिस्टर्ड अग्रीमेंट: अगर लीज डीड की अवधि 11 महीने से ज्यादा है तो उसे सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में रजिस्ट्रेशन एक्ट के सेक्शन 17 के तहत पंजीकृत कराना पड़ता है। रजिस्ट्रेशन न कराने पर इसे अमान्य सबूत माना जाएगा। डीड को चार महीने में रजिस्टर्ड कराया जा सकता है। अगर आप गैर-पंजीकृत लीज को कोर्ट के सामने पेश करते हैं तो आप पर 10 प्रतिशत ड्यूटी और पेनाल्टी भरनी पड़ सकती है। 
 
क्या मकानमालिक किरायेदार को निकाल सकता है?: अगर मकानमालिक किरायेदार को निकालना चाहता है तो उसके पास एक वैध कारण होना चाहिए। इसमें किराया नियंत्रण अधिनियम और भारतीय कानून के तहत आने वाले गलत काम शामिल हैं। इनमें आतंकवाद और राज्य के खिलाफ अपराध भी आते हैं। 
 
किरायेदारों के कानूनी वारिसों के अधिकार: किरायेदारों के वारिस भी किरायेदार ही हैं, उन्हें भी किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत संरक्षण मिलता है।
 
मकानमालिक को क्या करना चाहिए: अगर आप मकानमालिक हैं तो रेंट अग्रीमेंट में चार से पांच प्रतिशत किराया वृद्धि का क्लॉज जुड़वाकर किरायेदार को अपनी संपत्ति में ज्यादा रहने से रोक सकते हैं, अगर वह कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद मकान खाली नहीं करता। यह उन किरायेदारों पर नकेल कसता है, जो गड़बड़ी करते हैं। अगर नोटिस के बावजूद भी किरायेदार मकान खाली नहीं करता तो आप कोर्ट जा सकते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि किराया नियंत्रण अधिनियम किरायेदारों का पक्ष ज्यादा लेता है। लेकिन कोर्ट मकानमालिक के हक में भी फैसला दे सकता है। अगर अदालत को लगता है कि किरायेदार किसी गलत गतिविधि में शामिल है या मकान मालिक को घर किसी निजी काम के लिए चाहिए। किरायेदार को बाहर निकालने के लिए आप पुलिस का भी सहारा ले सकते हैं। 
 
किरायेदार को क्या करना चाहिए: अगर मकानमालिक को प्रॉपर्टी अपने निजी काम के लिए चाहिए तो उस स्थिति में किरायेदार ज्यादा कुछ नहीं कर सकता। लेकिन अगर मकानमालिक बिना किसी वैध कारण के किरायेदार को निकालने की कोशिश करता है तो वह पुलिस प्रोटेक्शन ले सकता है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आपके किरायेदारी के अधिकारों को साबित करने में मदद करते हैं।
 
सुप्रीम कोर्ट का क्या है फैसला: मकान मालिक-किरायेदारों के बीच विवाद से पैदा होने वाले मुकदमों पर सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला दिया है। एंटनी बनाम केसी इटॉओप एंड संस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि अगर किरायेदार अग्रीमेंट के तहत नियमित तौर पर किराया दे रहा है तो मकानमालिक उसे कम से कम 5 साल तक नहीं निकाल सकता। हालांकि अगर मकानमालिक को घर अपने निजी इस्तेमाल के लिए चाहिए तो वह किरायेदार को बाहर निकाल सकता है। 

 

Last Updated: Wed Jan 22 2020

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