📲
किराये पर घर देने वाले मकानमालिकों के ये हैं कानूनी अधिकार

किराये पर घर देने वाले मकानमालिकों के ये हैं कानूनी अधिकार

किराये पर घर देने वाले मकानमालिकों के ये हैं कानूनी अधिकार

किरायेदारों के अधिकार और उसे संरक्षित कैसे करना है, इसके बारे में हम काफी बातें कर चुके हैं। एक दूसरा पहलू लेनदेन का भी है। लेकिन भारत में किरायेदारी नियमों के मुताबिक कई एेसे भी अधिकार हैं, जो मकानमालिकों के लिए बनाए गए हैं।

साल 1948 में भारत सरकार ने किराया नियंत्रण कानून पास किया था, जिसके बाद दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों ने इसमें कई संशोधन किए हैं। हालांकि इस अधिनियम को किरायेदारों के समर्थक के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसमें मकानमालिकों के अधिकारों की सुरक्षा की बात भी कही गई है। हाल ही में इस कानून में कुछ और संशोधन किए गए हैं, जिसके नए नियमों में मकानमालिकों का समर्थन किया गया है।

भले ही आप पहली बार घर किराये पर दे रहे हों या देते रहते हों, आज हम आपको मकानमालिकों के कुछ बुनियादी अधिकारों के बारे में बताएंगे।

किरायेदार को निकालने का अधिकार: किरायेदारी पर रेंट कंट्रोल एक्ट सिर्फ 12 महीने के लिए ही लागू होता है। चीजें उन मकानमालिकों के लिए मुश्किल भरी हैं, जिनके घरों में किरायेदार वर्षों से रह रहे हैं। हाल ही में सुर्खियों में रहे ड्राफ्ट मॉडल किरायेदारी अधिनियम 2015 का मकसद मकानमालिकों और किरायेदारों के लिए चीजों को आसान बनाना है। इसमें आपसी सहमति से किराया तय करना, बेवक्त निकालना और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को लेकर संशोधन किया गया है। अब मकानमालिक किराये समझौते का उल्लंघन, बिना इजाजत किसी और को किराये पर रखना, पेमेंट में देरी, प्रॉपर्टी का दुरुपयोग और घर में गैर कानूनी गतिविधियां चलाने को लेकर किरायेदार को घर से निकाल सकता है अगर किरायेदार बिल्डिंग को अपने व्यवसाय के लिए इस्तेमाल करता है तब भी मकानमालिक उसे जाने को कह सकता है।

अगर समझौता खत्म होने के बाद भी किरायेदार नहीं निकलता तो इससे निजात पाने के लिए मकानमालिक अग्रीमेंट में किराया बढ़ोतरी का क्लॉज जोड़ सकता है।

इमारत पर अस्थायी कब्जा: अगर बिना खाली कराए बिल्डिंग में रिपेयरिंग, बदलाव और अन्य काम नहीं हो सकते या इमारत रहने के लिए असुरक्षित हो गई है तो एेसे में मकानमालिक को बिल्डिंग पर अस्थायी कब्जे का अधिकार दिया जाएगा। हालांकि उसके बाद किरायेदार को घर वापस दे दिया जाएगा।

किराया बढ़ाने का अधिकार: जहां तक किराये की बात है तो कानून में मकानमालिकों को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। रिहायशी या कमर्शियल प्रॉपर्टी मालिक सिर्फ मार्केट रेट्स के हिसाब से न सिर्फ किराया तय कर सकते हैं बल्कि उसे नियमित अंतरालों पर बढ़ा भी सकते हैं। किरायेदारी अधिनियम का ड्राफ्ट मॉडल शहरी आवासों को औपचारिक आवास क्षेत्र के तहत लाकर संतुलन बनाने का काम करता है। इस कानून में साफ तौर पर अवधि, उत्तराधिकार, किराये के अलावा मकान मालिक और किरायेदार के कामों का जिक्र होता है। भारत में हर दो वर्ष में 10 प्रतिशत तक किराया बढ़ाया जा सकता है। लेकिन ज्यादातर कानून इस पर भी लागू होते हैं। उदाहरण के तौर पर मकानमालिक दिल्ली रेंट कंट्रोल एक्ट की धारा 6 और 8 ए के अनुसार किराया बढ़ा सकते हैं।

जरूरी मरम्मत: यह मकानमालिक का काम है कि वह जरूरी अंतरालों पर घर में रिपेयरिंग का काम करवाए। प्रॉपर्टी में छोटी-मोटी रिपेयरिंग का काम किरायेदार भी करा सकता है। हालांकि बड़ी रिपेयरिंग के लिए रीइम्बर्स्मन्ट की जरूरत होगी। इसके लिए पहले मकानमालिक की इजाजत लेनी होगी। इसलिए कोई भी काम करने से पहले मकानमालिक को मालूम होना उसका अधिकार है, क्योंकि प्रॉपर्टी उसकी है। कानून के मुताबिक, मकानमालिक प्रॉपर्टी को अच्छी हालत में रखने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन रेंट कंट्रोल एक्ट में दोनों पार्टियां वित्तीय भार उठाएं, इसका भी प्रावधान है।

Last Updated: Tue Feb 11 2020

समान आलेख

@@Fri Feb 07 2020 12:07:08