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जेपी की मुश्किलें और बढ़ीं, सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई यमुना एक्सप्रेस-वे बेचने की याचिका

जेपी की मुश्किलें और बढ़ीं, सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई यमुना एक्सप्रेस-वे बेचने की याचिका

जेपी की मुश्किलें और बढ़ीं, सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई यमुना एक्सप्रेस-वे बेचने की याचिका
(Shutterstock)
जेपी असोसिएट्स का 165 किमी लंबा यमुना एक्सप्रेस वे बेचने का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में खारिज कर दिया। यह एक्सप्रेस-वे ग्रेटर नोएडा को आगरा से जोड़ता है। दिवालिया होने की कार्यवाही के बीच जेपी एसोसिएट्स इस एक्सप्रेस-वे को बेचकर पैसा जुटाना चाहता था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश को वापस लेने या संशोधित करने की जेपी की याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद अब यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई है। जेपी असोसिएट्स के लिए राहत की बात सिर्फ इतनी है कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर की डेडलाइन 9 दिन और बढ़ा दी है। बिल्डर अब 5 नवंबर तक 2000 करोड़ की पेनाल्टी भर सकता है। रियायत समझौते के लिए याचिका: चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानवालिकर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच ने यह फैसला दिया है। जयप्रकाश असोसिएट्स लिमिटेड (JAL) की ओर से कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी पेश हुए। उन्होंने कहा कि कंपनी को यमुना एक्सप्रेस-वे के संबंध में रियायत समझौते के तहत अपने अधिकारों को ट्रांसफर करने की इजाजत दी जानी चाहिए। कंपनी और सरकार के बीच यह समझौता एक वार्ता करार होता है, जो कंपनी को सरकार के अधिकार क्षेत्र के तहत कुछ शर्तों के साथ एक विशेष व्यवसाय को संचालित करने का अधिकार देता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिंगापुर की एक कंपनी ने इस समझौते में दिलचस्पी दिखाई थी और वह 2500-3000 करोड़ रुपये देने को तैयार थी। कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि घर खरीददारों के पैसे वापस लौटने के लिए जेएएल को यह बिक्री करनी होगी। घर खरीददारों को भी यह विश्वास दिलाना होगा कि उनका पैसा सुरक्षित है, क्योंकि कंपनी की संपत्ति 17000 करोड़ रुपये है और बदतर स्थितियों में भी वह 14,500 करोड़ रुपये में बिक सकती है। सिब्बल ने यह भी कहा कि हमें प्रॉपर्टी बेचने की अनुमति दें, वरना जेपी इन्फ्राटेक और जयप्रकाश असोसिएट्स खत्म हो जाएंगी। अन्य विपक्षी दिवालिया और बैंकरप्सी की कार्यवाही के बीच अधिकारों के ट्रांसफर पर विचार नहीं किया जा सकता, क्योंकि यही अंतरिम रेजॉल्यूशन प्रोफेशनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों और यमुना एक्सप्रेस-वे इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) ने रखा था। सुप्रीम कोर्ट का आश्वासन: जो पैसा जेएएल को जमा कराना है, उसे पीड़ित घर खरीददारों को लौटा दिया जाएगा। बेंच का मानना है कि जब से उन्होंने घर खरीददारों की चिंताओं को उठाना शुरू किया है, तब से उन्हें रिफंड के रूप में बकाया मिल रहा है। बिल्डर्स से कहा जाएगा कि अगर फ्लैट तैयार नहीं हैं तो वे लोगों का पैसा वापस कर दें। यह है खरीददारों का नजरिया: जब जेएएल ने सुप्रीम कोर्ट में यमुना एक्सप्रेस-वे बेचने की याचिका दायर की तो घर खरीददारों की चिंताएं बढ़ गईं। ग्रेटर नोएडा के रहने वाले और ग्राहक दीपक जैन ने अपनी परेशानी फेसबुक पर जाहिर की। उन्होंने लिखा, यमुना एक्सप्रेस-वे को उसकी कीमत से 15 प्रतिशत पर क्यों बेचा जा रहा है। कंपनी हमारा पैसा खा रही है, जो यमुना एक्सप्रेस-वे में लगा हुआ है। आईआरपी को लिखे खत में घर खरीददार ने कहा कि नवंबर 2013 की प्रेजेंटेशन के मुताबिक जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड (JIL) ने एक्सप्रेस-वे के निर्माण में 13000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिसकी कीमत अब कम बताई जा रही है। यह सुप्रीम कोर्ट को भ्रमित करने का तरीका भी हो सकता है। रिपोर्ट्स यह भी आई थीं कि जेपी ने 1100 फ्लैट्स का पोजेशन देने की बात कही है। इस मामले पर एक अन्य पीड़ित ग्राहक चंचला मिश्रा ने लिखा, आखिरी 10 प्रतिशत काम पूरा न होने के बावजूद पोजेशन लेटर्स अॉफर किए गए थे। लोग पोजेशन ले रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि कंपनी के दिवालिया होने के कारण उनके निवेश किए गए पैसे डूब सकते हैं। जेपी लोगों के डर और बेबसी का शोषण कर रहा है। कब क्या हुआ 9 अगस्त- नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद बेंच ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड 2016 के सेक्शन 7 के तहत आईडीबीआई बैंक द्वारा जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ याचिका स्वीकार कर ली। अगस्त: जेपी इन्फ्राटेक से 180 दिनों के भीतर पूरा बकाया चुकाने या निश्चित अवधि में कोई रेजॉल्यूशन ढूंढने को कहा गया। कोर्ट ने 24 अगस्त 2017 तक बैंकों और ग्राहकों से क्लेम करने को कहा। अगस्त: NCLT ने दिवालिया कार्यवाही की देखरेख के लिए अनुज जैन को जेपी इन्फ्राटेक का सीईओ नियुक्त किया। अगस्त: लोगों ने सड़क और सोशल मीडिया पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। -नोएडा अथॉरिटी ने घर खरीददारों के हितों की रक्षा करने का आश्वासन दिया। -नोएडा अथॉरिटी के सीईओ अमित मोहन प्रसाद ने अपने बयान में कहा कि लोगों की खून-पसीने की कमाई को डूबने नहीं दिया जाएगा। -अथॉरिटी लोगों का पैसा वापस दिलाने की प्रक्रिया पर काम करेगी। -जेपी के बिना बिके सामान पर प्राधिकरण द्वारा कब्जा किया जाना है और नीलामी की प्रक्रिया की इजाजत के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखा जा चुका है। -जो खरीददार एक वित्तीय लेनदार की श्रेणी में आता है, उसे 24 अगस्त से पहले फॉर्म-सी भरना होगा। इसे वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। -केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भरोसा दिलाया कि जिन ग्राहकों ने भी रियल एस्टेट में निवेश किया है, उन्हें अपना घर जरूर मिलेगा। -22 अगस्त : सरकार का कहना है कि क्या घर खरीदारों को 24 अगस्त तक किसी क्लेम को फाइल करने की जरूरत होगी। बिल्डर्स घर खरीदारों द्वारा किए गए भुगतान के रिकॉर्ड्स को आसानी से हासिल और किसी भी तरह की गड़बड़ी की जांच के लिए उन्हें हर घर खरीदार को भेज सकते हैं। जेपी अमन प्रोजेक्ट के ग्राहकों को क्लेम फॉर्म भरने की जरूरत नहीं है। - 24 अगस्त : सुप्रीम कोर्ट 30 हजार से ज्यादा घर ग्राहकों की याचिका पर सुनवाई करेगा। घर ग्राहक की ओर से लड़ रहे सीनियर एडवोकेट ने कहा कि एक बार ये लोग फॉर्म एफ साइन कर देंगे तो वह कंज्यूमर कोर्ट में बिल्डर के खिलाफ कोई केस दायर नहीं कर पाएंगे। 25 अगस्त: सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 4 सितंबर 2017 तक टाल दी। 31 अगस्त: जेपी इन्फ्राटेक प्रोजेक्ट में करीब 16000 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। इसलिए ग्राहकों का निवेदन है कि हर रेजॉल्यूशन प्लान को मॉनिटर और प्रोजेक्ट को पूरा करने वाला पैसा किसी एस्क्रो अकाउंट में रखा जाना चाहिए। इन घर खरीददारों ने उत्तर प्रदेश सरकार से भी दखल देने की मांग की है। 31 अगस्त: यमुना एक्सप्रेस-वे इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) ने जेपी के रद्द हो चुके 6 प्रोजेक्ट्स के घर खरीददारों को भरोसा दिलाया है कि उनका पैसा वापस जरूर मिलेगा। रद्द हो चुके ये 6 प्रोजेक्ट्स हैं:-बुद्ध सर्किट 01, बुद्ध सर्किट-02, नेचर व्यू, बुलेवर्ड, अमन-III और उड़ान। यहां निर्माण कार्य शुरू भी नहीं हुआ और पोजेशन 2016 के लिए अनुसूचित कर दी गई है। YEIDA ने कहा कि अगर कंपनी अक्टूबर 2017 के आखिर तक रिफंड की पहली किस्त का भुगतान नहीं करती तो उसकी लीज को रद्द और पैसे की वसूली के लिए संपत्तियों को बेच दिया जाएगा। इन प्रोजेक्ट्स में करीब 3,300 ग्राहकों ने निवेश किया है। 1 सितंबर: ग्राहकों की शिकायतों के मद्देनजर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 3 सदस्ययी कमिटी का गठन किया है। शहरी विकास मंत्री सुरेश खन्ना, उद्योग मंत्री सतीश महाना और गन्ना विकास और चीनी मिलों के राज्य मंत्री सुरेश राणा इस समिति के सदस्य हैं। इन मंत्रियों ने बहुत विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया कि प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए सह-डिवेलपर की मदद ली जाएगी। घर खरीददारों को यह आश्वासन भी दिया गया है कि बाकी बची किसी भी राशि का भुगतान करने की जरूरत नहीं है। लेकिन फोकस फ्लैट्स दिलाने पर है, क्योंकि ज्यादातर लोग रिफंड या मुआवजा लेने की बजाय फ्लैट लेना चाहते हैं। 12 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट ने जेपी असोसिएट्स को निर्देश दिया कि वह 27 अक्टूबर तक 2000 करोड़ रुपये जमा करे। इसके अलावा सभी डायरेक्टर्स और मैनेजिंग डायरेक्टर्स को निर्देश दिया गया है कि वह बिना इजाजत देश छोड़कर न जाएं। यह फैसला ग्राहकों के हितों की रक्षा करने के लिए लिया गया है, क्योंकि ज्यादातर लोग नौकरीपेशा हैं। अगर कंपनी अपनी संपत्तियां बेचकर पैसा जुटाने पर विचार करती है तो उसे कोर्ट से इजाजत लेनी होगी। कोर्ट ने सुनवाई के लिए अगली तारीख 13 नवंबर और अंतरिम रेजॉल्यूशन प्लान के लिए 45 दिनों का वक्त दिया है। सितंबर: रिपोर्ट्स के मुताबिक चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि हम कंपनियों के लिए नहीं बल्कि ग्राहकों के हितों के बारे में सोच रहे हैं। 19 सितंबर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जेपी प्रोजेक्ट्स के घर ग्राहकों को आश्वासन दिलाया है कि बिल्डर नवंबर से 600 फ्लैट्स हर महीने डिलीवर करेगा। यह फैसला सतीश महाना, सुरेश राणा और सुरेश खन्ना को भी बता दिया गया है। 9 अक्टूबर: सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में ही जेपी की किसी भी याचिका पर सुनवाई या फैसले में संशोधन करने से इनकार कर दिया था। यह भी आदेश दिया गया है कि कंपनी 27 अक्टूबर तक कोर्ट में 2 हजार करोड़ रुपये जमा कराए। 17 अक्टूबर: जिन 1150 ग्राहकों ने जेपी विश टाउन और कॉसमॉस में पैसा लगाया है, उन्हें दो महीने पहले ही पोजेशन लेटर मिल गए थे। अगर काम ठीक से चला तो दिसंबर 2017 तक अन्य 2300 घर भी मिल जाएंगे। जेपी ने यह भी कहा था कि उसकी यमुना एक्सप्रेस-वे से 2500 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है।
Last Updated: Tue Mar 12 2019

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