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ऐसे करें पैतृक संपत्ति में अपने हिस्से का दावा

ऐसे करें पैतृक संपत्ति में अपने हिस्से का दावा

ऐसे करें पैतृक संपत्ति में अपने हिस्से का दावा
(Shutterstock)
अगर आम भाषा में कहा जाए तो जो संपत्ति या जमीन आपके बुजुर्ग छोड़कर जाते हैं, उसे पैतृक संपत्ति कहा जाता है. लेकिन मुंबई के 27 साल के अजिंक्य को इस बात का संदेह है कि उन्हें अपने दादा द्वारा खरीदी गई कृषि भूमि में हिस्सा मिलेगा या नहीं. उनके पिता बिना उनकी मंजूरी लिए वह भूमि बेचने की योजना बना रहे हैं.
ऐसे में उनके लिए उस जमीन पर दावा ठोकने के क्या विकल्प हैं?
 
हिंदू कानून के मुताबिक संपत्तियों को दो भागों में बांटा जाता है- पैतृक संपत्ति और खुद कमाई हुई. यूं तो पैतृक संपत्ति भी खुद कमाई हुई और किसी शख्स के दादा की गैरविभाजित संपत्ति होती है. मकानआईक्यू आपको उन बातों से रूबरू कराएगा, जो पैतृक संपत्ति में अधिकार से जुड़ी हैं. 
 
क्या है पैतृक संपत्ति: कानूनी भाषा में कहें तो पुरुषों की चार पीढ़ियों तक जो संपत्ति विरासत में मिली हो उसे पैतृक संपत्ति कहा जाता है. पैतृक संपत्ति में हिस्से का अधिकार जन्म के समय ही मिल जाता है. यह विरासत के अन्य प्रारूपों जैसा नहीं होता, जहां मालिक के मरने के बाद विरासत में संपत्ति मिलती है. 
 
पैतृक संपत्ति में बाप-बेटे का हिस्सा: पिता (पैतृक संपत्ति का मौजूदा मालिक) और उसके बेटे का प्रॉपर्टी पर बराबर हक होता है. हालांकि पहली पीढ़ी का हिस्सा (पिता और उसके भाई-बहन) पहले तय होता है. इसके बाद की पीढ़ियों को पुरखों से मिले हिस्से को बांटना पड़ता है.
 
पैतृक संपत्ति में बेटे और बेटियों का हिस्सा: दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2016 में फैसला दिया था कि बेटे का अपने माता-पिता द्वारा 'कमाई हुई संपत्ति' पर कोई कानूनी हक नहीं है. आदेश में कहा गया, ''जहां घर माता-पिता द्वारा बनाया गया हो, वहां बेटे, चाहे वह शादीशुदा हो या कुंवारा, का घर में रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. वह सिर्फ अपने माता-पिता की दया पर ही घर में रह सकता है, जब तक माता-पिता चाहें.''
 
पैतृक संपत्ति का परिवारवालों के बीच बंटवारा होने के बाद यह पैतृक संपत्ति नहीं रह जाएगी. यह पिता की मर्जी होगी कि वह खुद बनाई हुई संपत्ति अपने बेटे के नाम करता है या नहीं. लेकिन यह चीज पैतृक संपत्तियों के मामले में वैध नहीं है. 
 
हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून, 2005 पैतृक संपत्ति में बेटों के साथ-साथ बेटियों को भी बराबर उत्तराधिकार का दर्जा देता है. कानून में संशोधन से पहले सिर्फ परिवार के पुरुषों को ही उत्तराधिकारी का दर्जा दिया जाता था. लेकिन हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के प्रावधान 6 में संशोधन कर उसमें बेटियों को भी उत्तराधिकारी का दर्जा दिया गया. 
 
पैतृक संपत्ति के बारे में कुछ जरूरी बातें:
 
*पैतृक संपत्ति में हिस्से का अधिकार पैदा होते ही मिल जाता है.
 
*अगर पैतृक संपत्ति को बेचा जाता है या उसका बंटवारा होता है तो बेटियों को भी उसमें से हिस्सा मिलेगा.
 
*अजिंक्य के सवाल पर आएं तो पैतृक संपत्ति बिना उत्तराधिकारियों से राय-मशविरे के बेची नहीं जा सकती. लेकिन उस पर दोबारा दावा कोर्ट में बंटवारे का मुकदमा दायर कर ठोका जा सकता है. 
 
*इसी तरह अगर आपको हिस्सा देने से इनकार किया जाता है तो आप अपने अधिकार के लिए कानूनी नोटिस भेज सकते हैं.
 
*पैतृक संपत्ति उस प्रॉपर्टी को माना जाएगा, जिसका हिंदू जॉइंट फैमिली के सदस्यों के बीच बंटवारा नहीं हुआ है.
 
*एक बार पैतृक संपत्ति का बंटवारा होने के बाद हर उत्तराधिकारी को मिला हिस्सा उसकी खुद कमाई हुई संपत्ति बन जाता है.
 
*वहीं मां की ओर से मिली संपत्ति पैतृक संपत्ति नहीं मानी जाएगी.
 
*हिंदू कानून के मुताबिक गैर विभाजित परिवार के मुखिया के पास परिवार की संपत्तियों को संभालने का जिम्मा होगा. लेकिन जब बात मालिकाना हक और पैतृक संपत्ति पर अधिकारों की आती है तो हर उत्तराधिकारी को अपना हिस्सा मिलेगा.    
Last Updated: Thu Feb 03 2022

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