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होम लोन के लिए अप्लाई कर रहे हैं तो जानिए लीजहोल्ड और फ्रीहोल्ड प्रॉपर्टीज में फर्क

होम लोन के लिए अप्लाई कर रहे हैं तो जानिए लीजहोल्ड और फ्रीहोल्ड प्रॉपर्टीज में फर्क

होम लोन के लिए अप्लाई कर रहे हैं तो जानिए लीजहोल्ड और फ्रीहोल्ड प्रॉपर्टीज में फर्क
(Dreamstime)
अगर आप होम लोन के लिए अप्लाई करने की सोच रहे हैं तो आपको फ्रीहोल्ड और लीजहोल्ड प्रॉपर्टी के बीच फर्क पता होना चाहिए। फ्रीहोल्ड और लीजहोल्ड संपत्तियां कानूनी स्वामित्व की दो अलग श्रेणियों में आती हैं। यह उस रकम पर बहुत ज्यादा असर डालती है जो बैंक आपको बतौर होम लोन देता है। मकानआईक्यू आपको फ्रीहोल्ड और लीजहोल्ड संपत्तियों के बीच फर्क बताने जा रहा है।
 
यह है दोनों के बीच फर्क:
 
आपने गौर किया होगा कि जब आप एक प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो एक गिरवी बिल (यह एक कानूनी दस्तावेज है, जिसके जरिए संपत्ति के स्वामित्व का अधिकार बतौर सिक्योरिटी पट्टेदाता द्वारा पट्टेदार को दिया जाता है) होता है, जो आपके पोजेशन का अधिकार सुनिश्चित करता है। इस तरह की संपत्ति को लीजहोल्ड माना जाता है, फ्रीहोल्ड नहीं। यह फर्क कानूनी 'स्वामित्व' के प्रकार की वजह से है।
 
अगर यह लीजहोल्ड प्रॉपर्टी है तो मकानमालिक की जमीन पर बनी होगी और मकानमालिक को फ्रीहोल्डर माना जाएगा। भले ही आप संपत्ति के मालिक हों, लेकिन फिर भी सच यही है कि जिस जमीन पर यह बनी है, वह फ्रीहोल्डर की है। बतौर लीजहोल्डर आपको एक तय अवधि, जिसे लीज कहते हैं, के लिए लीज रेंट चुकाना होता है। लीज खत्म हो जाने के बाद (जब लीज के सभी भुगतान कर दिए जाते हैं) तो जमीन के साथ-साथ संपत्ति भी फ्रीहोल्ड हो जाती है और लीजहोल्डर के पास पोजेशन के रूप में आ जाती है (जो अब फ्रीहोल्डर है)। अगर आप तय अवधि में लीज के किराये का भुगतान नहीं कर पाते तो आपका संपत्ति पर कोई कानूनी अधिकार नहीं रह जाएगा और इससे स्वामित्व लीजहोल्डर से फ्रीहोल्डर के पास चला जाएगा।
 
जब आप फ्रीहोल्ड संपत्ति खरीदते हैं तो इसका मतलब है कि आप जमीन के साथ-साथ संपत्ति के भी मालिक होंगे। आपको लीज रेंट नहीं चुकाना पड़ेगा। फ्रीहोल्ड संपत्ति की मार्केट वैल्यू हमेशा ज्यादा रहती है, साथ ही बैंक भी आपको ज्यादा होम लोन देने को तैयार रहते हैं। 
 
लीजहोल्ड या फ्रीहोल्ड: किसमें है ज्यादा फायदा?
 
लीज अग्रीमेंट्स (लीजहोल्ड संपत्तियों के लिए) दशकों के लिए साइन किए जाते हैं और लीजहोल्डर को लीज अवधि खत्म होने के बाद (आमतौर पर 99 साल) उसे बढ़वाने के लिए एक निश्चित राशि चुकानी पड़ती है। लीज होल्ड संपत्तियों के लिए होम लोन देने से पहले बैंक और वित्तीय संस्थान प्राधिकरण के नॉन अॉब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) की मांग करते हैं। उदाहरण के तौर पर न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट अथॉरिटी (NOIDA) लीजहोल्ड पर अपार्टमेंट/सोसाइटी प्रोजेक्ट्स बनाने के लिए जमीन देती है।
 
डिेवेलपमेंट अथॉरिटी (फ्रीहोल्डर) संपत्ति के मालिक को ट्रांसफर मेमोरेंडम और ग्राहक को स्वामित्व के अधिकार देते हैं। प्रॉपर्टी के लिए होम लोन अप्लाई करते वक्त आपको इस दस्तावेज को जमा करना पड़ता है। लीजहोल्ड प्रॉपर्टी की लेनदेन जनरल पावर अॉफ अटॉर्नी के जरिए होती है। एेसा इसलिए क्योंकि अगर मकानमालिक/फ्रीहोल्डर का निधन हो जाता है तो जीपीए के पास प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने का अधिकार होगा।  
 
फ्रीहोल्ड संपत्तियों को सुरक्षित निवेश माना जाता है। वह इसलिए क्योंकि फ्रीहोल्ड संपत्ति का रजिस्ट्रेशन पहले हो चुका होता है और फ्रीहोल्ड संपत्तियों की कीमतें लंबी अवधि में बढ़ती ही हैं। जितनी संपत्ति की मार्केट वैल्यू होती है, उतनी ही ज्यादा बैंक आपको होम लोन रकम मुहैया कराते हैं (संपत्ति के बाजार मूल्य का 80 प्रतिशत लोन-टू-वैल्यू है)। फ्रीहोल्ड प्रॉपर्टी के मालिक का संपत्ति पर पूरा अधिकार होता है, जिसमें राइट टू ट्रांसफर, रिपेयर, रिनोवेशन और बेचना शामिल होता है।
 
होम लोन लेते वक्त इसका रखें ध्यान:
 
-एक संभावित होम लोन ग्राहक के तौर पर आपको यह समझना चाहिए कि केवल शारीरिक रूप से संपत्ति रखना काफी नहीं है। जिस संपत्ति के लिए होम लोन लिया जाता है, कर्जदाता उसे कानूनी और तकनीकी रूप से वेरिफाई करते हैं। प्रॉपर्टी टाइटल साफ और मार्केट के अनुरूप है, इसके लिए कर्जदाता कानूनी व्यवहार्यता की जांच करते हैं। जब फ्रीहोल्ड संपत्ति के मालिकाना हक में बदलाव होता है तो कई दस्तावेज जमा कराने पड़ते हैं। 
 
सब-रजिस्ट्रार के अॉफिस में प्रॉपर्टी टाइटल और स्वामित्व के दस्तावेज चेक करने की सलाह दी जाती है। इस सर्विस के लिए आपको मामूली फीस चुकानी पड़ती है। लेकिन यह आपको प्रॉपर्टी टाइटल में होने वाली धोखाधड़ी और नुकसान से बचाता है। 
Last Updated: Wed Mar 21 2018

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